मध्यप्रदेश का गठन
आचार्य मनु ने अपनी प्रसिद्ध कृति मनुस्मृति में म.प्र. को इंगित करते हुए, इस प्रकार से परिभाषित किया है, जो हिमालय और विन्ध्याचल के बीच का हिस्सा है और विनशन (वह प्रदेश जहाँ सरस्वती नदी का लोप हुआ) के पूर्व में है तथा प्रयोग के पश्चिम में है, वह मध्यप्रदेश कहा गया है। पूर्व और पश्चिम के सागरों तक विस्तीर्ण वह क्षेत्र जो इन दोनों पर्वतों हिमालय और विंध्याचल के बीच में है, उसे विद्वान लोग आर्यावर्त कहते हैं ।
- चन्द्रगुप्त द्वारा स्थापित मौर्य साम्राज्य का अंग रहा यह क्षेत्र और सम्राट अशोक के समय बोद्ध धर्म के आलोक से प्रकाशित होने वाला मध्यप्रदेश 1 नवम्बर, 1956 को देश के नक्शे पर अपने नये रूप में उदित हुआ था ।
- नया मध्यप्रदेश, मध्य भारत, विन्ध्य प्रदेश, भोपाल राज्य एवं पुराने मध्यप्रदेश के हिन्दी भाषा-भाषी क्षेत्र के एकीकरण से बना ।
- सन् 1956 के पूर्व छत्तीसगढ़ और वर्तमान महाकौशल, सी.पी.एण्ड बरार के हिस्से थे, जिन्हें सम्मिलित रूप से मध्यप्रदेश कहा जाता था, लेकिन उसकी सीमा रेखा और स्थिति वर्तमान मध्यप्रदेश से काफी भिन्न थी ।
- मध्यप्रदेश देश के मध्य में स्थित है। इसलिए इसे 'हृदय प्रदेश' भी कहा जाता है। >
- मध्यप्रदेश को ब्रिटिश काल में 'सेन्ट्रल प्रोविंस और बरार नाम से जाना जाता था।
- प्रदेश को मध्यप्रदेश' नाम पंडित जवाहरलाल नेहरू ने दिया
- स्वतंत्रता पश्चात् मध्यप्रदेश को 'स्टेट A, B तथा C में बाँटा गया
- सेन्ट्रल प्राविनस तथा बरार में छत्तीसगढ़ और बघेलखण्ड को मिलाकर पार्ट -A (स्टेट A) बनाया गया।
- पश्चिम की रियासतों को मिलाकर पाट B (स्टेट-B) बनाया गया। इसका नाम मध्य भारत रखा।
- उत्तर की रियासतों को मिलाकर पाट -c (स्टेट-C) बनाया गया।
- भोपाल पाट c स्टेट था ।
राज्य श्रेणी
- A श्रेणी राज्य- श्रेणी 'क' अथवा अंग्रेजी में 'A' के अंतर्गत वे राज्य रखे गये थे जो ब्रिटिश शासक के प्रत्यक्ष नियंत्रण में रह चुके थे। जैसे- बिहार, बम्बई, म.प्र. मद्रास, पंजाब, उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, यू.पी. (संयुक्त प्रांत) असम और आंध्रप्रदेश कुल 10 राज्य
- B श्रेणी राज्य- श्रेणी 'ख' अथवा अंग्रेजी में 'B' श्रेणी में देशी रियासतें थी, जो प्रत्यक्षतः ब्रिटिश भारत में सम्मिलित नहीं थी। कुल 275 देशी रियासतों को मिलाकर कुछ प्रांतों का निर्माण किया गया। जैसे राजस्थान, मध्यभारत, ट्रावणकोर-कोचीन, सौराष्ट्र, हैदराबाद, मैसूर, जम्मू-कश्मीर, पेप्सू (पटियाला और पूर्वी पंजाब के राज्यों का संघ) कुल 8 राज्य
- c श्रेणी राज्य- इस श्रेणी के अंतर्गत 61 बड़ी रियासतों जैसे- अजमेर, भोपाल, विन्ध्यप्रदेश, कच्छ, बिलासपुर, कुर्ग कर्नाटक हिमाचल प्रदेश, 10 मणिपुर, त्रिपुरा, दिल्ली आदि सम्मिलित थे।
- D श्रेणी राज्य- इस श्रेणी 'घ' अथवा अंग्रेजी में 'D' में केन्द्रशासित तथा छोटे प्रदेश अंडमान-निकोबार आदि सम्मिलित थे ।
सेंट्रल प्रोविंस एण्ड बरार ( पार्ट - अ / स्टेट - A )
- अंग्रेजो ने जब पेशवा सिंधिया और भोंसले के महाकौशल क्षेत्र पर कब्लजा कर लिया तो इसे नये प्रांत के रूप में गठित कर इसे "सागर-नर्मदा टेरिटरीज” नाम दिया। फिर भोंसले से नागपुर क्षेत्र छीन लिया और दोनों सागर-नर्मदा टेरिटरीज और नागपुर को मिलाकर 2 नवम्बर, 1861 में 'सेन्ट्रल प्राविन्स' नाम दिया गया ।
- 1903 में बरार (विदर्भ) के चार जिले तथा निजाम से 'छत्तीसगढ़' छीनकर नया प्रांत बनाया, जिसे सेन्ट्रल प्राविन्स एण्ड बरार नाम दिया गया।
- इस नये प्रांत बनाया, जिसे सेन्ट्रल प्राविन्स एण्ड बरार नाम दिया गया।
- इस नये प्रांत की राजधानी नागपुर को बनाया गया।
- स्वतंत्रता के बाद महाकौशल और छत्तीसगढ़ की कुछ और रियासतों को मिलाकर 1950 में इसे A श्रेणी का राज्य घोषित किया गया।
- सन् 1950 में नया संविधान लागू होने के साथ ही यह 'मध्यप्रदेश' कहा जाने लगा। नागपुर बरार के आठ जिले निकल जाने के बाद हिन्दी भाषी 14 जिले थे।
- नये मध्यप्रदेश बनने के दो दिन पहले यानि 30 अक्टूबर, 1956 को तीन नये जिले बनाये गये। ये थे दमोह, सिवनी तथा नरसिंहपुर ।
- ये जिले 1932 में समाप्त कर क्रमश: सागर, छिंदवाड़ा और होशंगाबाद में मिला दिये गये थे। इस प्रकार महाकौशल के 17 जिले नये राज्य में मिले।
- इसके प्रथम मुख्यमंत्री पण्डित रविशंकर शुक्ल थे और राज्यपाल ई. राघवेन्द्र राव थे। प. रविशंकर पुनर्गठिन म.प्र. के भी प्रथम मुख्यमंत्री बने।
मध्य भारत प्रांत ( पार्ट -B / स्टेट-B)
- पश्चिम की 25 रियासतों को मिलाकर 22 अप्रैल, 1948 को मध्य भारत" प्रांत का गठन किया गया ।
- इसका विधिवत् उद्घाटन 28 मई, 1948 को पण्डित जवाहर लाल नेहरू ने जय विलास महल ग्वालियर में किया ।
- साथ ही जीवाजीराव सिंधिया को मध्य भारत प्रांत का राजप्रमुख नियुक्त किया गया तथा इन्दौर के होलकर राजवंश के यशवंत राव को उप राजप्रमुख बनाया गया। तब राजप्रमुख का दर्जा राज्यपाल के बराबर होता था, साथ ही धार और खिलचीपुर के शासन कनिष्ठ उप राजप्रमुख बनाये ।
- पं. नेहरू के फैसले के अनुसार प्रतिवर्ष सात माह ग्वालियर और पाँच माह इन्दौर को राज्य की राजधानी बनाया गया ।
- ग्वालियर को शीतकालीन तथा इन्दौर को ग्रीष्मकालीन राजधानी घोषित किया गया जो 1 नवंबर 1956 तक यथावत् रहा।
- 1946-48 की अवधि में यहाँ निर्वाचित मंत्रीमंडल ने शासन किया, जिसके प्रमुख लीलाधर जोशी थे, फिर गोपीकृष्ण विजयवर्गीय, तखतमल जैन और मिश्रीलाल गंगवाल मुख्यमंत्री हुए।
- पुनर्गठन (1956) के समय "तखतमल जैन" मध्य भारत प्रांत के मुख्यमंत्री थे।
- इन्दौर में 5 माह राजधानी का कामकाज मोती बंगला से होता था । यह होल्कर राजवंश का सचिवालय हुआ करता था ।
- इन्दौर और ग्वालियर के महाराजा अपने-अपने राज्यों को केन्द्र बनाकर दो अलग-अलग संघो के पक्षधर थे। व्ही.पी. मेनन ने बड़ी मुश्किल से, सरदार पटेल के कड़े रूख के कारण, अंततः दोनो को एक संघ के लिए सहमत किया ।
- 22 अप्रैल, 1948 को 22 रियासतों के शासकों ने एक संघ बनाने के समझौत पर हस्ताक्षर किये। नये राज्य का नामकरण हुआ, 'यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ ग्वालियर, इन्दौर और मालव' ।
- जब भारतीय संविधान 1950 में लागू हुआ तब इसका नाम 'मध्यभारत' लिखा गया
विंध्य प्रदेश ( पार्ट - C / स्टेट - C )
- विन्ध्यप्रदेश का गठन और भी टेढ़ीखीर साबित हुआ । यह क्षेत्र मूलतः दो क्षेत्रों में बँटा था, बुन्देलखण्ड और बघेलखण्ड ।
- अंततः 13 मार्च, 1948 को राजाओं ने समझौते पर हस्ताक्षर कर दिय ।
- 4 अप्रैल, 1948 को केन्द्रीय मंत्री, एन.व्ही. गाडगिल ने विन्ध्यप्रदेश राज्य का उद्घाटन किया।
- इस प्रकार स्वतंत्रता के बाद उत्तर (बुंदेलखण्ड और बघेलखण्ड) की 38 रियासतों को मिलाकर 'विंध्यप्रदेश' (पार्ट-c) का गठन मार्च 1948 में किया गया ।
- इस प्रांत की राजधानी 'रीवा' को बनाया गया ।
- विंध्य गिरि की पहाड़ियों में स्थित होने के कारण इस प्रदेश का नाम "विंध्य प्रदेश" पड़ा ।
- सर्वप्रथम इस राज्य को रीवा बघेलखण्ड तथा बुंदेलखण्ड दाक इकाईयों के रूप में रखा गया जिनके राज प्रमुख रीवा के महाराजा मार्तण्ड सिंह देव नियुक्त हुए।
- 4 अप्रैल, 1948 को संयुक्त राज्य विंध्य प्रदेश का उद्घाटन एन.वी. गाडविल द्वारा किया गया था।
- रीवा के महाराजा मार्तण्ड सिंह देव ने राजप्रमुख पद की शपथ ली ।
- कप्तान अवधेश प्रतापसिंह के नेतृत्व में बघेलखण्ड मंत्रिमण्डल का गठन हुआ ।
- जुलाई 1948 में दोनों सरकारों को संयुक्त कर एक मंत्रिमण्डल की स्थापना की गई। इसका प्रधान कप्तान अवधेश प्रतापसिंह को बनाया गया ।
- 14 अप्रैल, 1949 को प्रतापसिंह सरकार के इस्तीफ के बाद 1 मई, 1949 को श्रीनाथ मेहता के नेतृत्व में सरकार बनाई गयी।
- 1 जनवरी, 1950 को 'विंध्यप्रदेश' से केन्द्र प्रशासति पार्ट सी स्टेट बन गया ।
- 25 जनवरी 1950 को विंध्यप्रदेश की द्वीपवत इकाइयाँ (दतिया जिले को छोड़कर) उत्तर प्रदेश, मध्य भारत और म.प्र. को हस्तांतरित कर दी गई ।
- 1951 में पार्ट सी राज्यों में लोकतंत्रीय शासन के लिए "गवर्नर ऑफ पार्ट सी स्टेट्स एक्ट" पास हुआ।
- एक एक्ट के अनुसार 1952 में विंध्यप्रदेश में 60 प्रतिनिधियों की निर्वाचित विधायिका गठित हुई।
- तत्पश्चात 2 अप्रैल 1952 के मुख्यमंत्री शंभूनाथ शुक्ल के नेतृत्व में मंत्रिमण्डल का गठन किया गया।
भोपाल राज्य
- आधुनिक भोपाल रियासत की नींव एक अफगान सरदार दोस्त मोहम्मद खान ने डाली जो पूर्व में मुगल सेना में था ।
- दोस्त मोहम्मद ने बैरसिया और उत्तर में शमशाबाद को सर्वप्रथम अपने अधिकार में लिया ।
- तत्पश्चात् उसने चौहानों से जगदीशपुर छीनकर उसका नाम इस्लाम नगर रख दिया ।
- आधुनिक भोपाल का जन्मदाता दोस्त मोहम्मद को ही माना जाता है।
- अंग्रज सत्तकाल में देशी रियासतों का सम्मिलित कर सेन्ट्रल इंडिया एजेंसी स्थापित की गई और भोपाल मुस्लिम शासकों के अधीन एक प्रमुख राज्य बना।
- 17 मई, 1926 को गद्दीनशीन, नवाब हमीद उल्लाह खान, योग्य और चतुर शासक थे।
- मार्च 1948 में हमीदुल्ला खान ने घोषणा की कि वह अपनी रियासत को स्वतंत्र रखना चाहता है, जबकि जनमत विलय के पक्ष में था 1 दिसम्बर 1948 में विरोध प्रदर्शन शुरू हुए।
- नवाब लगातार इस कोशिश में लगे रहे कि भोपाल स्वतंत्र बना रहे उन्होंने बहुत टाल मटोल की, परन्तु अंतः मध्य भारत और विन्ध्यप्रदेश के बनने के एक साल बाद 30 अप्रैल, 1949 को भारत में विलय का समझौता करना पड़ा।
- भोपाल में यह नवाबी शासन 1949 तक बरकरार रहा।
- भोपाल की पहली महिला शासन कुदसिया बेगम (गोहर बेगम) थी ।
- तत्कालीन गृहमंत्री (भारत सरकार) सरदार वल्लभ भाई पटेल के प्रयासों ने नवाब हमीदुल्ला से भारत सरकार का एक विलय समझौता हुआ और 1 जून, 1949 को भोपाल रियासत भारत का चीफ कमिश्नर शासित प्रदेश बना।
- इसी के साथ इसको पाट सी स्टेट घोषित किया गया तथा श्री एन. बी. बैनर्जी यहाँ के मुख्य आयुक्त नियुक्त हुए।
- जनवरी 1952 में चुनाव हुए और 20 मार्च 1952 को निर्वाचि प्रतिनिधियों ने शासन संभाला।
- पुनर्गठन के समय (1956 में) इसके मुख्यमंत्री डॉ. शंकरदयाल शर्मा थे।
- मध्यप्रदेश सरकार अधिसूचना नं. 2477 / 1977 / सओन / दिनांक 13 सितम्बर, 1972 को सीहोर जिले से अलग कर भोपाल को जिला बनाया गया। जिसकी विधिवत् स्थापना 2 अक्टूबर 1972 को हुई।
- इस प्रकार 1947 से 1956 तक मध्यप्रदेश चार भोगों में विभाजित था
- महाकौशल मध्यप्रदेश के निर्माण के पूर्व सेन्ट्रल प्राविन्स के अंतर्गत महाकौशल क्षेत्र में सम्मिलित जिलों में सागर, दमोह, नरसिंहपुर, जबलपुर, सिवनी, छिंदवाड़ा, बालाघाट, शहडोल, मंडला, डिण्डोरी, बैतूल, होशंगाबाद, खण्डवा खरगोन आदि । छत्तीसगढ के जिले- रायपुर, बिलासपुर, अम्बिकापुर, रायगढ़, दुर्ग, राजनांदगाँव एवं बस्तर भी महाकौशल में सम्मिलित थे।
- महाकौशल की राजधानी जबलपुर थी ।
- राज्य पुनर्गठन से सम्बन्धित आयोग
- राज्यों के पुनर्गठन की मांग के प्रमुख कारण -
1. ब्रिटिश काल में अव्यवस्थित रूप से राज्यों का गठन2 1918 की मान्टेयू-चेम्सफोर्ड- रिपोर्ट में माना कि वर्तमान इकाईयां अव्यवस्थित तथा असुविधाजनक है।3. विभिन्न श्रेणी के राज्य A, B, C व D I
- 1903 - सर हरबर्ट रिजले भाषा के आधार पर बंगाल विभाजन
- 1911- लार्ड हार्टिग आयोग बंगाल विभाजन को निरस्त करने की मांग
- मोतीलाल नेहरू रिपोर्ट (1928)- भाषा, जन इच्छा, जनसंख्या वित्तीय > 1930 के संविधान आयोग जाति, धर्म, आर्थिक भौगोलिक एकरूपता के आधार बताए ।
- श्याम कृष्ण (एस.के.) आयोग (1948) ने माना कि केवल भाषायी आधार पर राजय न बने अपितु प्रशासनिक सुविधा, इतिहास, भौगोलिक, आर्थिक, सांस्कृतिक आधार पर हो।
- 1936 की संवैधानिक सुधार समिति की अनुशंसा पर साम्प्रदायिक आधार पर सिंध प्रांत का गठन।
- जे.वी.पी., नेहरू, पटेल, डॉ. पट्टाभि सीतारमैया समिति (1948) ने भाषायी आधार का बहुत कम समर्थन किया प्रभावित जनता की इच्छा प्रशासनिक व्यवहार्यता, आर्थिक आधार पर जोर दिया ।
- स्वतंत्रता के बाद भाषा के आधार पर मांग को लेकर सामाजिक कार्यकर्ता श्री रामुलु ने पृथक तेलुगु राज्य मद्रास से पृथक (आंधप्रदेश) की मांग के लिए आमरण अनशन प्रारंभ किया और 58 दिन के अनशन कारण उनकी 1952 में मृत्यु हो गई।
- परिणामस्वरूप 1953 में मद्रास प्रांत का विभाजन कर तेलुगु भाषा-भाषी राज्य आंध्रप्रदेश का गठन किया गया । 1 अक्टूबर, 1953 को गठन हुआ।
