|| Mountains of Madhya Pradesh ||
मध्यप्रदेश में पर्वत
मध्यप्रदेश के प्रमुख पर्वत
भारत का हृदय प्रदेश मध्यप्रदेश दक्षिण के प्रायद्वीपीय पठार का भाग है। इसी कारण इसका निर्माण पठार तथा नदी घाटियों के साथ-साथ पर्वतीय संरचनाओं से हुआ है। प्रदेश की प्रमुख पर्वत श्रृंखलाएं निम्नलिखित हैं-
1. विंध्याचल पर्वत- प्रदेश का सर्वाधिक प्राचीन पर्वत के साथ-साथ भारत के हिमाचल पर्वत से भी प्राचीन यह पर्वत उत्तरी भारत को दक्षिणी भारत से अलग करता है। यह एक भ्रंशीय पर्वत है जो कि मालवा पठार के दक्षिण तथा नर्मदा नदी के उत्तर में स्थित है। इसका निर्माण सिलिका सेंट बलुआ लाल पत्थर तथा क्वार्टज में हुआ है। विंध्याचल पर्वत की प्रदेश के मालवा क्षेत्र में सर्वोच्च चोटी सिगार की चोटी (881 मीटर) है जो कि मालवा क्षेत्र में स्थित है।
इस पर्वत के पूर्वी विस्तार को भांडेर तथा कैमूर पहाड़ी कहते हैं। इस पर्वत के मध्य भाग में विदिशा की उदयगिरि की पहाड़ी तथा रायसेन जिले के पास स्थित भीमबेटिका की पहाड़ी मौजूद है।
भाण्डेर पर्वत का विस्तार प्रदेश में पन्न, छतरपुर, दतिया आदि जिलों में विस्तारित है। भाण्डेर पर्वत की सर्वोच्च ऊंची चोटी सिद्ध बाबा 1171 मीटर दतिया में है जबकि कैमूर श्रेणी का विस्तार रीवा, सतना सीधी में विस्तारित है। यह टोंस तथा यमुना नदी के बीच जल विभाजक का कार्य करती है।
2. सतपुड़ा श्रेणी - यह पर्वत श्रेणी नर्मदा व ताप्ती नदी के बीच में स्थित है। पश्चिमी सतपुड़ा को राजपीपला की पहाड़ी कहा जाता है। राजपीपला पहाड़ी का विस्तार गुजरात से लेकर म.प्र. के बुरहानपुर दर्रे तक हैं । बुरहानपुर दर्रे के पूर्व दिशा से ताप्ती नदी सिकलती है। यह ग्रेनाइट व बेसाल्ट की चट्टानों से निर्मित है। सतपुड़ा मैकाल श्रेणी की लंबाई 900 किमी. एवं ऊंचाई लगभग 770 मीटर है। इस पर्वत श्रेणी से वेन, गंगा, वर्धा, तवा तथा ताप्ती नदी का उद्गम होता है.
A. पश्चिमी सतपुड़ा अथवा (राजपीपला की पहाड़ी)C. मैकल श्रेणीB. पूर्वी सतपुड़ा अथवा महादेव पहाड़ी
A. पश्चिमी सतपुड़ा अथवा (राजपीपला की पहाड़ी) :
पश्चिमी सतपुड़ा कटी-फटी है जिसका कारण इसके दोनों ढलानों को नर्मदा, ताप्ती नदियों की सहायक नदियों द्वारा फाटा जाना है। पश्चिमी सतपुड़ा में अखरानी की पहाड़ी, बड़वानी की पहाड़ी, बीजागढ़ की पहाड़ी, असीरगढ़ की पहाड़ी स्थित है। नर्मदा नदी तथा असीरगढ़ पहाड़ी के बीच निमाड़ का मैदान स्थित है।
B. महादेव श्रेणी:-
सतपुड़ा श्रेणी की मध्य भाग पर्याप्त चौड़ा है जिसे पूर्वी सतपुड़ा कहते है इसी में महादेव श्रेणी स्थित है। महादेव श्रेणी में पचमढ़ी की पहाडी (होशंगाबाद) है जिसकी धूपगढ़ की चोटी (1350 मीटर) है जिसे प्रदेश की सर्वाधिक ऊंची चोटी होने का गौरव प्राप्त हुआ। महादेव पर्वत का विस्तार होशंगाबाद, छिंदवाड़ा, नरसिंहपुर व सिवनी में है। ⏩"पचमढ़ी को सतपुड़ा की रानी कहा जाता है। "⏪ पूर्वी सतपुड़ा क्षेत्र में कोयले का संकेन्द्रण पाया जाता है। पुर्वी सतपुड़ा श्रेणी का निर्माण आर्कियन तथा गोंडवाना की चट्टानों से हुआ है।
C. मैकल श्रेणी:-
सतपुड़ा श्रेणी का पूर्वी विस्तार सर्वाधिक चोड़ा हैं जिसे मेकल श्रेणी के नाम से जाना जाता है जो कि अर्द्धचंद्राकर में उत्तर से दक्षिण दिशा में विस्तारित है। मैकल श्रेणी का अधिकांश भाग अब छत्तीसगढ़ में स्थित है। यह श्रेणी अधिकांशतः सघन वनों से अच्छादित है। यहां से विभिन्न दिशाओं में बहने वाली अनेक नदियां का उद्गम होता है। इसी श्रेणी में अमरकंटक का पठार अपकेंद्रीय प्रतिरूप का उदाहरण प्रस्तुत करता है। मेकल से और पूर्व में जाने पर छोटा नागपुर व राजमहल की पहाड़ियाँ भी मिलती है लेकिन यह विस्तार राज्य के बाहर है। सतपुड़ा श्रेणी की दूसरी सबसे ऊंची चोटी अमरकंटक (1124 मीटर) है । जो कि मैकल श्रेणी में स्थित है।


